शनिवार, 17 मार्च 2012

‘दागी’ की फिर सुरक्षा की कमान

सूबे की पूर्ववर्ती सरकार के सबसे ताकतवर अफसर शशांक शेखर सिंह के कथित चहेतों को हटाने के फेर में दिल्ली में राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित वीवीआईपी की सेवा व सुरक्षा की कमान नई राज्य सरकार ने फिर उसी दागी को सौंप दी है, जिसे कीमती सामानों की चोरी आरोपों में निलंबित किया गया था। राज्य सरकार ने इस दागी की तैनाती उत्तर प्रदेश सदन का प्रबंध अधिकारी पद देने के साथ ही प्रदेश भवन का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा है।

दोनों अतिथि गृहों के तकरीबन आधा दर्जन अधिकारी व कर्मचारियों को लखनऊ में संपत्ति विभाग मुख्यालय से संबद्ध करने का आदेश भी दिया गया है। इनमें माया सरकार के ताकतवर अफसर की कृपापात्र दो महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सदन में दिल्ली प्रवास के दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अफसरों क ी सुरक्षा, आवासीय एवं खानपान आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी राज्य संपत्ति विभाग के प्रबंध अधिकारी की होती है। शासन द्वारा शुक्रवार देर रात यह जिम्मेदारी राज्य संपत्ति विभाग के नसीम अख्तर को सौंपी है।

नसीम समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर अल्पसंख्यक नेता के कृपापात्र हैं। इसी प्रभाव की बदौलत माया सरकार के पहले की सपा सरकार में नसीम को प्रदेश सदन के प्रबंध अधिकारी के पद पर तैनात किया गया था। तब नसीम ने सदन के  फर्नीचर, कारपेट व अन्य कीमती साजसज्जा के सामान आदि में बड़ी हेराफेरी की थी। इसे लेकर भी वह कई बार विभागीय उच्चाधिकारियों के निशाने पर रहे।

वर्ष 2007 में बसपा सरकार बनने के बाद नसीम की कारगुजारियां सामने आर्इं। तत्कालीन राज्य संपत्ति सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोप सही मानते हुए निलंबित करने के आदेश दे दिए। तत्कालीन निदेशक राज्य संपत्ति प्रभात मित्तल ने नई दिल्ली में यूपी सदन का मुआयना कर जांच रिपोर्ट शासन क ो सौंपी।

जब रिपोर्ट सामने आई तो शासन ने दिल्ली में तैनात अपर स्थानिक आयुक्त को पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करने को कहा। साथ ही आरोपी प्रबंध अधिकारी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दे दिए थे। अपर स्थानिक आयुक्त जांच रिपोर्ट में भी उप्र सदन से सामानों की हेराफेरी की पुष्टि हुई। नसीम पर सदन की व्यवस्था में शिथिलता बरतने और अधीनस्थों पर नियंत्रण न रखने के आरोपों की भी पुष्टि हुई। इसके बाद लगभग साढेÞ तीन वर्ष नसीम निलंबित रहे और राज्य सम्पत्ति विभाग के  लखनऊ स्थित मुख्यालय से संबद्ध रहे।

 सूत्रों का कहना है कि इस बीच नसीम ने जांच रिपोर्ट पर सख्ती से बचने के लिए सारी कवायद की और अंतत: निलंबन वापसी कराने में सफल रहे। बहरहाल, सपा सरकार बनते ही यह दागी अधिकारी दोबारा से सक्रिय हुआ। उधर, सपा सरकार के मंत्रियों-विधायकों ने शपथ ली और इधर नसीम ने उसी कद्दावर अल्पसंख्यक नेता के सहारे दोबारा यूपी सदन में तैनाती के आदेश करा लिए।

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गुरुवार, 15 मार्च 2012

अखिलेश बने मुख्यमंत्री


समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक दल के नेता चुने गए अखिलेश यादव ने 15 मार्च, 2012 को उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर आजम खान, शिवपाल यादव व रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया सहित 19 विधायकों ने कैबिनेट और 28 ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इनमें कुछ को छोड़ दिया जाए तो लगभग सारे पुराने चेहरे हैं।

लखनऊ के लामार्टीनियर कॉलेज मैदान में आयोजित समारोह में राज्यपाल बी. एल. जोशी ने 38 वर्षीय अखिलेश यादव को प्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। वह प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री हैं। अखिलेश यादव के साथ 47 अन्य ने मंत्री पद की शपथ ली।

कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले 19 नेताओं में सपा मुखिया मुलायम के भाई शिवपाल यादव, महासचिव आजम खान, निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, वकार अहमद शाह, बलराम यादव, अहमद हसन, महेंद्र अरिदमन सिंह, आनंद सिंह, अम्बिका चौधरी, अवधेश प्रसाद, पारस नाथ यादव, ओम प्रकाश सिंह, दुर्गा प्रसाद यादव, राम गोविंद चौधरी, ब्रह्माशंकर तिवारी, कामेश्वर उपाध्याय, राजाराम पांडे, शिव कुमार बेरिया और राज किशोर सिंह शामिल हैं।

राज्य मंत्री के तौर पर इकबाल मसूद, महबूब अली, शाहिद मंजूर, फरीद महफूज किदवई, वसीम अहमद, रियाज अहमद, कमाल अख्तर, नरेन्द्र सिंह यादव, शिवप्रताप यादव, राजीव कुमार सिंह, राजेन्द्र सिंह राणा, राममूर्ति वर्मा, मानपाल सिंह वर्मा, मनोज पारस, मूलचन्द्र चौहान, अभिषेक मिश्रा, नरेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र सिंह पटेल, रामपाल राजवंशी, अरूणा कोरी, अरविन्द सिंह गोप, विनोद सिंह उर्फ  पंडित सिंह, भगवत शरण गंगवार, चितरंजन स्वरूप, शंखलाल मांझी, राम करन आर्य, जगदीश सोनकर व कैलाश चौरसिया को शामिल किया गया।

बेरोजगारी भत्ता देने पर मुहर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महज सात घंटे के बाद  मंत्रिमंडल की पहली बैठक में अखिलेश यादव ने बेरोजगारी भत्ता और लैपटॉप देने का अपना वादा पूरा किया। मंत्रिमंडल में 35 साल से ऊपर की उम्र के शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का फैसला हुआ है। फिलहाल 9 लाख पंजीकृत बरोजगार हैं। करीब 1100 करोड़ रुपए हर वर्ष बेरोजगारी भत्ते में खर्च होने का अनुमान है।

छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट
मंत्रिमंडल ने उत्तीर्ण होने वाले इंटर पास छात्रों को लैपटॉप और हाईस्कूल पास छात्रों को टैबलेट देने का फैसला किया। दोनों कक्षाओं में करीब 50 लाख छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट देने होंगे। जिसमें प्रतिवर्ष करीब 3,000 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है।

दसवीं पास मुस्लिम कन्याओं को 30 हजार
कक्षा दस उत्तीर्ण करने वाली मुस्लिम समाज की हर श्रेणी की कन्या को आगे की शिक्षा व विवाह के लिए 30 हजार रुपए का अनुदान देने, कब्रस्तानों की भूमि पर अवैध कब्जे रोकने के लिए उनके चारों तरफ चाहरदीवारी का निर्माण करने, लखनऊ शहर के महत्वपूर्ण चौराहों पर सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगाने और कांस्टेबल व हेड कांस्टेबलों की स्थानांतरण उनके गृह जनपद के आस-पास के जनपद में करने का निर्णय भी लिया गया। सारे निर्णय नए वित्तीय वर्ष से लागू होंगे।

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